रक्तिम तिवारी/अजमेर.
इंजीनियरिंग क्षेत्र में त्वरित नौकरियों के लिए अब कौशल आधारित पाठ्यक्रम भी चलेंगे। इंजीनियरिंग कॉलेज में बी.टेक-एमटेक की पढ़ाई के साथ वोकेशनल की शरुआत होगी। यह कोर्स राजस्थान आईएलडी कौशल विश्वविद्यालय ने तैयार किए हैं।
सरकारी और निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में करीब 60 हजार सीट हैं। रोजगार की अच्छे अवसरों के बावजूद यहां बी.टेक और एमटेक स्तर पर पारम्परिक कोर्स ही संचालित हैं। दूसरे राज्यों के इंजीनियरिंग कॉलेज में कौशल और वोकेशनल कोर्स की भरमार है। विद्यार्थियों को वोकेशनल कोर्स से उद्यम और रोजगार में लाभ हुआ है।
टेक्नोक्रेट्स में दक्षता जरूरी..
बी.टेक और एमटेक डिग्रीधारक युवाओं को मनमाफिक रोजगार नहीं मिल रहे। कैंपस प्लेसमेंट में दक्षता, और प्रशिक्षण की कमी उजागर होती हैं। लिहाजा तकनीकी शिक्षा विभाग ने इंजीनियरिंग कॉलेज में वोकेशनल कोर्स चलाने का फैसला किया है। राजस्थान आईएलडी कौशल विश्वविद्यालय ने वोकेशनल कोर्स तैयार किए हैं। इनमें ग्राफिक डिजाइन, ऑटोमेटिव रिपेयर, एसी रिपेयर मैनेजमेंट, हेल्थ केयर, फूड प्रिजर्वेशन और अन्य कोर्स शामिल हैं।
Read More: RPSC: आरएएस मेन्स 2018 रिजल्ट के लिए लगाई हाईकोर्ट में स्पेशल याचिका
कॉलेज ने किए आवेदन
इंजीनियरिंग कॉलेज बड़ल्या ने तीन वोकेशनल कोर्स के लिए आवेदन किया है। एमबीए विभाग में बैंकिंग फाइनेंसिंग सर्विस एन्ड इंश्योरेंस, ट्रेवल एंड टूर तथा मैकेनिकल ब्रांच में ऑटोमोबाइल सर्विस कोर्स शामिल है। तकनीकी शिक्षा विभाग की मंजूरी के बाद सत्र 2020-21 से कोर्स शुरू होंगे। वोकेशनल कोर्स छह महीने से एक-दो साल की अवधि के होंगे।
Read More: श्रमिकों का टोटा : धौलपुर की फैक्ट्रियां उगल नहीं रही धुआं
नई ब्रांच और कोर्स में रुचि कम
राज्य में 15-20 वर्षों में कई सरकारी और निजी कॉलेज खुले हैं। मांग के अनुरूप नई ब्रांच और कोर्स और भी शुरू हुए हैं, फिर भी देश के अन्य राज्यों की तुलना में यह संख्या सीमित है।
कॉलेज ने एमबीए और मैकेनिकल ब्रांच में वोकेशनल कोर्स के लिए आवेदन किया है। कोर्स राजस्थान आईएलडी कौशल विश्वविद्यालय ने डिजाइन किए हैं। जल्द इन कोर्स की शुरुआत होगी।
डॉ. यू. एस. मोदानी, प्राचार्य बॉयज इंजीनियरिंग कॉलेज





No comments:
Post a Comment