बाड़मेर.
यह बाड़मेर जिले के रामसर कस्बे का सोनिया चैनल है। कस्बे में एक तालाब था और उससे करीब दो किलोमीटर दूरी पर पहाडिय़ां। जब भी बारिश आती कुदरती ढलान से पानी इस तालाब में आता। बारिश के कुछ दिनों बाद पानी सूख जाता और फिर पानी की किल्लत। क्षेत्र में बारिश के बाद पेयजल के लिए बेरियां(छोटी कुइयां) बनाई जाती है जो रेगिस्तान में भूमिगत जल से कुदरती रिचाजज़् होती है और इससे मीलों दूर से पहुंचकर लोग प्यास बुझाते। इस तालाब में भी कुछ बेरियां बनी थी। 2007-08 में ग्राम पंचायत में प्रस्ताव लिया कि पहाड़ का पानी एक चैनल के जरिए तालाब तक लाया जाए और फिर इन बेरियों को रिचार्ज करें तो पेयजल समस्या का समाधान हो सकता है। तात्कालीन कांगे्रस अध्यक्ष सोनिया गांधी का दौरे के दौरान यह बात बताई तो उन्होंने अपने पास खड़े मुुख्यमंत्री अशोक गहलोत को संकेत दिया। फिर क्या था बीएडीपी(सीमंात क्षेत्र विकास कायज़्क्रम) के तहत 25 लाख रुपए का बजट देकर चैनल का निर्माण हुआ और करीब 100 बेरियों की मरम्मत भी हुई। सोनिया चैनल आसपास के 65 गांवों के लिए बारह मास पेयजल का स्रोत बन गया।
होने लगी अनदेखी
इसके बाद फिर इसकी अनदेखी होने लगी। चैनल रेत से अट गया और बेरियां जजज़्र होने लगी। वाटर हावेज़्स्टिंग के इतने बड़े सिस्टम को प्रशासन भी भूल गया। करीब सात सालल तक सोनिया चैनल की सफाई व अन्य ध्यान नहीं देने से बेरियां जर्जर हो गई। कई बेरियां जमींदोज भी हो गई।
पहुंंचे कोठारी, सुझाया समाधान
26 नवंबर 2018 को राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादक रामसर पहुंचे तो उन्होंने सोनिया चैनल के हाल देखे। उन्होंने सोनिया चैनल का हों उद्धार....शीर्षक से अभियान चलाकर इसकी हालत सुधरवाने के लिए निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह राजस्थान के लिए विशेष है। इस पर काम किया जाए तो देशभर में ऐसे चैनल तैयार कर पेयजल समस्या का समाधान किया जा सकता है।
चला अभियान तो जागा प्रशासन
इसके बाद पत्रिका में फरवरी 2018 में अभियान चला। जिसको प्रशासन ने गंभीरता से लेते हुए 18 बेरियों का तत्काल निर्माण करवाया। एक बेरी पर करीब 80 हजार रुपए व्यय हुए । चैनल की भी मनरेगा योजना में सफाई हुई है। चैनल एकबार फिर जीवत हुआ।
आया पहली बारिश का पानी
इस बार की पहली बारिश में ही तालाब में चैनल के जरिए पानी पहुंचा है और अब बेरियां डूब में गई है। ग्रामीण कहते है कि सोनिया चैनल की तरह ही वाटर हावेज़्स्टिंग के ग्रामीण सोच के सिस्टम तैयार किए जाए तो पेयजल समस्या का बड़ा समाधान हो सकता है।





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