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जोधपुर. कोरोना ने खुद से संक्रमित हुए मृतकों के परिजनों से अंतिम संस्कार करने का हक छीन रखा है। इस दौर में कई लोग तो अंतिम संस्कार से पहले अपनों का चेहरा भी ढंग से नहीं देख सके। इस बात का मलाल कोरोना संक्रमित मृतकों का अंतिम संस्कार करने वाले सरकारी मुलाजिमों को भी हैं।
जोधपुर में कोरोना मृतकों के अंतिम संस्कार में अहम भूमिका निभाने वाले टोंक जिला परिषद् के अधिशासी अभियंता नरेश बोहरा भी जब संक्रमितों का अंतिम संस्कार करवाते हैं तो भावुक हो जाते हैं। जमीन में दफनाने व गैस की अग्नि से जलने वाले सभी शवों के लिए बोहरा नम आंखों से एक बात जरूर दोहराते हैं कि हिन्दू हैं तो राम स्वर्ग दें और मुस्लिम हैं तो अल्लाह जन्नतुल फिरदौस अता करें। बोहरा की इस खासियत का पूरा प्रशासन कायल है।
जाना था टौंक, अटक गए जोधपुर में
एक्सईएन बोहरा दिसंबर तक जोधपुर विकास प्राधिकरण में प्रतिनियुक्ति पर तैनात थे। प्रतिनियुक्ति समाप्त होने पर इन्हें एपीओ कर जयपुर भेजा गया। वहां से मार्च के द्वितीय सप्ताह में टोंक जिला परिषद् में पदस्थापन हुआ। लॉक डाउन के कारण बोहरा जा नहीं सके। जिला परिषद् जोधपुर को ऐसे कार्य के लिए किसी जज्बाती व्यक्ति की तलाश थी। जिला परिषद् के सहायक अभियंता ओपी परिहार ने बोहरा का नाम सुझाया। बोहरा भी इस पुनित कार्य के लिए राजी हो गए। बोहरा इस कार्य के लिए जोधपुर में ऑफिसर इंचार्ज है। परिहार बतौर सहायक प्रभारी सेवाएं दे रहे हैं। इन दोनों की भावुकता व कर्तव्यपरायणता की सभी तारीफ करते हैं।
बिलखते हैं परिजन, भर आती हैं आंखें
बोहरा कहते हैं कि कोरोना संक्रमित मृतकों के अंतिम संस्कार के वक्त अब चार परिजन मौजूद रह सकते हैं। परिजन दूर से ही बिलख-बिलख कर अपनों को अंतिम विदाई देते हैं। कोई बेटा अपने बाप की मौत पर बिलखता है तो कोई बूढ़ा बाप अपने जवान बेटे की मौत पर फूट-फूट कर रोता है। मृतक के परिजन भी संक्रमण के संदेह में होते है। ऐसे में उन्हें कोई सांत्वना देने वाला भी नहीं होता है। ये दृश्य बड़ा असहनीय बन जाता है। जोधपुर में अभी तक 33 कोरोना संक्रमित मृतकों के अंतिम संस्कार किए गए हैं। जिनमें 28 जोधपुर व 5 अन्य जिलों के हैं।





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