रक्तिम तिवारी/भगवतदयाल सिंह/अजमेर.
खान-पान और आश्रय स्थल की कमी के चलते आम दिनों में हमें पैंथर, भालू, सियार, चिडिय़ा, मैना, अन्य पशु-पक्षी कम नजर आते थे। लेकिन दो महीने चले लॉकडाउन वन्य जीवों के लिए फायदेमंद साबित हुआ। टॉडगढ़-रावली अभ्यारण्य में पैंथर और अन्य जीवों की हलचल में बढ़ोतरी हुई है। अभ्यारण्य को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है।
लॉक डाउन के बाद टॉडगढ़ अभ्यारण्य क्षेत्र में वाहनों की आवाजाही थमने एवं शोर कम होने वन्य जीवों की संख्या बढ़ गई। रावली वन क्षेत्र में आठ पैंथर का कुनबा होने की बात सामने आई है। अन्य वन्य जीवों का मूवमेंट भी बढ़ा है।
बढ़ रहा है पैंथर का कुनबा
रावली अभ्यारण्य क्षेत्र में पैंथर का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। रावली क्षेत्र में आठ से दस पैंथर होने की संभावना है। अभ्यारण्य से पैंथर व रीछ ब्यावर व सेलागुडा रेंज की ओर जाते है। बीते दिनों एक पैंथर शिंकजे में फंस गया था। वन विभाग ने उसे रेस्क्यू कर घने जंगल में छोड़ा था। हाल में एक मादा पैंथर की पैंथर के आपसी विवाद में मृत्यु हो गई थी। 24 मई को भालू गांव थूनी का थाक में नजर आया था। सेंदडा सहित आस-पास के क्षेत्र में भालू लगातार नजर आ रहे हैं।
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बन सकता है टूरिज्म स्पॉट
टॉडगढ़-रावली अभ्यारण्य 195.27 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। पर्यठ, शूटिंग एवं एडवेंचर स्पोट्र्स विस्तार की यहां संभावनाएं हैं। इससे कुंभलगढ़ अभ्यारण्य भी जुड़ता है। देवगढ़, नाथद्वारा, उदयपुर, कुंभलगढ़, हल्दीघाटी से इसे जोड़ा जा सकता है। इसके अलावा रावली क्षेत्र ट्रेकिंग व रोमांचक खेलों की शुरुआत हो सकती है। पर्वतारोहण इसमें प्रमुख है। गेस्ट हाउस से तालाब के आस-पास पैंथर समेत कई वन्य जीवों को आसानी से देखा जा सकता है।
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करने होंगे यह प्रयास
-वन्य जीवों के आश्रय स्थल के निकट रोकें मानवीय हलचल और शोर-शराबा
-शहरीकरण की निर्धारित करें सीमा
-प्राकृतिक आवास, भोजन-पानी का प्रबंधन
-वन्य जीवों-पक्षियों के लिए बनाएं जलाशयों पर प्राकृतिक वैटलैंड
टॉडगढ़-रावली अभ्यारण्य में पैंथर सहित अन्य वन्य जीव है। लॉकडाउन के दौरान पैंथर, सांभर, भालू और अन्य वन्य जीवों को मूवमेंट का मौका मिला। गणना में यह वन्य जीव नजर आए हैं।
राकेश शर्मा, क्षेत्रीय वन अधिकारी, टॉडगढ़ रावली अभ्यारण्य





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